प्रोस्टेट कैंसर: पुरुषों की चुप्पी और जीवन की चुनौती — जानिए लक्षण, कारण और बचाव के आसान उपाय
"बीमारी तब नहीं डराती, जब उसके बारे में पूरी जानकारी हो" — यह बात खास तौर पर प्रोस्टेट कैंसर के लिए बिल्कुल सटीक बैठती है।
आज भी भारत और दुनिया भर में पुरुष स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर बात करने में झिझकते हैं। लेकिन जब बात प्रोस्टेट कैंसर की हो — तो यह सिर्फ एक बीमारी नहीं, एक चेतावनी है जो उम्र के साथ और भी गंभीर रूप ले सकती है।
अभी हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन को प्रोस्टेट कैंसर होने की पुष्टि ने फिर से दुनिया का ध्यान इस ओर खींचा है। आइए इस लेख में जानते हैं कि प्रोस्टेट कैंसर क्या होता है, इसके लक्षण, कारण, इलाज और इससे बचाव के प्रभावी उपाय कौन से हैं।
प्रोस्टेट कैंसर क्या है?
प्रोस्टेट एक छोटी सी ग्रंथि होती है जो पुरुषों के प्रजनन तंत्र का हिस्सा होती है। यह मूत्राशय के नीचे और मलाशय के सामने स्थित होती है। इस ग्रंथि का मुख्य कार्य वीर्य में वह तरल बनाना होता है जो शुक्राणुओं को पोषण और सुरक्षा देता है।
जब इस ग्रंथि की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने लगती हैं, तो इसे प्रोस्टेट कैंसर कहा जाता है। यह कैंसर धीमी गति से बढ़ता है लेकिन लक्षण देर से सामने आते हैं, जिससे समय पर पहचान और इलाज मुश्किल हो जाता है।
कब आता है खतरे का पहला संकेत? | लक्षण
प्रारंभिक चरण में इसके कोई विशेष लक्षण नहीं होते, लेकिन जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है, कुछ संकेत मिलने लगते हैं:
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बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में
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पेशाब के समय जलन या दर्द
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मूत्र या वीर्य में खून आना
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पीठ, कूल्हे या जांघों में दर्द
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यौन इच्छा में कमी या नपुंसकता
ये लक्षण प्रोस्टेट कैंसर के हो सकते हैं लेकिन ये अन्य बीमारियों से भी जुड़े हो सकते हैं, इसलिए सटीक जांच बहुत जरूरी है।
प्रोस्टेट कैंसर के संभावित कारण और जोखिम
उम्र
50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में इसका जोखिम काफी बढ़ जाता है।
आनुवंशिक कारण
यदि आपके पिता या भाई को यह बीमारी हो चुकी है, तो आपका रिस्क 2 से 3 गुना बढ़ सकता है।
खानपान और जीवनशैली
फैट से भरपूर भोजन, मोटापा, धूम्रपान और व्यायाम की कमी इसका खतरा बढ़ा सकते हैं।
प्रोस्टेट कैंसर की पहचान कैसे होती है?
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PSA टेस्ट (Prostate-Specific Antigen): खून की जांच से यह पता चलता है कि प्रोस्टेट ग्रंथि में कोई असामान्यता तो नहीं।
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डिजिटल रेक्टल एग्ज़ाम (DRE): डॉक्टर हाथ से प्रोस्टेट को जांचते हैं।
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बायोप्सी: यदि PSA टेस्ट असामान्य हो, तो ग्रंथि से टिश्यू निकालकर जांच की जाती है।
इन तीनों टेस्ट से यह तय किया जाता है कि कैंसर है या नहीं और यदि है तो किस स्टेज पर है।
ग्लीसन स्कोर और स्टेजिंग क्या है?
ग्लीसन स्कोर से कैंसर की गंभीरता का अंदाजा लगाया जाता है। 6 या उससे कम स्कोर धीमे बढ़ने वाले कैंसर को दर्शाता है, जबकि 8-10 स्कोर का मतलब होता है कि कैंसर आक्रामक और तेजी से फैलने वाला है।
जो बाइडन का स्कोर 9 है, जिसका मतलब है कि कैंसर काफी गंभीर है और हड्डियों तक फैल चुका है।
प्रोस्टेट कैंसर ग्रेडिंग स्केल
यह चार्ट डॉक्टरों द्वारा प्रोस्टेट कैंसर की गंभीरता समझने और इलाज तय करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
30 लाख तक हो हो सकती सकती है है पोस्टेट कैंसर से पीड़ितों की संख्या वर्ष 2040 तक
इलाज के विकल्प क्या हैं?
सर्जरी (Prostatectomy)
प्रोस्टेट ग्रंथि को हटाया जाता है। यह ऑप्शन आमतौर पर शुरुआती स्टेज के लिए होता है।
रेडिएशन थेरेपी
कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए उच्च ऊर्जा किरणों का इस्तेमाल किया जाता है।
हार्मोन थेरेपी
टेस्टोस्टेरोन (पुरुष हार्मोन) को कम करके कैंसर को बढ़ने से रोका जाता है।
कीमोथेरेपी
दवाओं के ज़रिए कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। यह आमतौर पर एडवांस स्टेज में किया जाता है।
एक्टिव सर्विलांस
अगर कैंसर बहुत धीमी गति से बढ़ रहा है, तो इलाज की बजाय नियमित जांच रखी जाती है।
इलाज के दुष्प्रभाव: जानना ज़रूरी है
प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करने से कई बार पुरुषों को हार्मोनल बदलावों से गुजरना पड़ता है।
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सेक्सुअल डिसफंक्शन,
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इरेक्टाइल डिसऑर्डर,
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थकावट,
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मूड स्विंग्स — ये कुछ आम साइड इफेक्ट हैं।
कई मरीजों को स्पर्म फ्रीज़िंग का विकल्प सुझाया जाता है, ताकि भविष्य में वे IVF जैसी तकनीकों की मदद से पिता बन सकें।
बचाव के आसान उपाय
1. संतुलित आहार लें
फल, हरी सब्ज़ियाँ और कम वसा वाले उत्पादों को भोजन में शामिल करें।
2. नियमित व्यायाम करें
30 मिनट की रोज़ाना फिजिकल एक्टिविटी आपके हार्मोन को बैलेंस रखती है।
3. धूम्रपान और शराब से बचें
यह प्रोस्टेट ही नहीं, कई अन्य कैंसर के लिए भी ज़िम्मेदार हो सकते हैं।
4. 50 साल की उम्र के बाद नियमित जांच
हर साल PSA टेस्ट और DRE करवाएं — क्योंकि रोकथाम इलाज से बेहतर है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
क्या प्रोस्टेट कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव है?
अगर समय रहते पता चल जाए तो हां, कई मामलों में प्रोस्टेट कैंसर पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
PSA टेस्ट कितनी बार कराना चाहिए?
50 साल की उम्र के बाद हर साल एक बार कराना चाहिए। जिनके परिवार में इसका इतिहास है, वे 45 के बाद शुरू करें।
क्या प्रोस्टेट कैंसर सेक्स लाइफ को प्रभावित करता है?
हां, खासकर इलाज के बाद, लेकिन स्पर्म फ्रीज़िंग और थेरेपी से इसका समाधान संभव है।
क्या यह बीमारी युवा पुरुषों को भी हो सकती है?
बहुत कम मामलों में, लेकिन हां — विशेष रूप से अगर आनुवांशिक फैक्टर हो।
निष्कर्ष
प्रोस्टेट कैंसर कोई अंत नहीं, बल्कि एक चेतावनी है — कि समय रहते सचेत हो जाएं।
50 की उम्र के बाद पुरुषों को अपनी सेहत के प्रति और सजग होने की ज़रूरत है। सही जानकारी, समय पर जांच और संतुलित जीवनशैली से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
जो बाइडन की कहानी हमें यही सिखाती है — बीमारी कोई भेदभाव नहीं करती, लेकिन जागरूकता से हम उसका सामना मज़बूती से कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जनरल अवेयरनेस के लिए है। यह किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह नहीं है। किसी भी लक्षण या शंका की स्थिति में डॉक्टर से अवश्य परामर्श लें।
