"दिल मांगे और नहीं – जानिए कितनी कार्डियो है दिल के लिए सही?"
आजकल सेहत को लेकर लोग जितने जागरूक हैं, उतना ही भ्रमित भी। खासतौर पर जब बात आती है दिल की सेहत और कार्डियो एक्सरसाइज की। एक तरफ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि दौड़िए, जिम जाइए, एक्टिव रहिए। दूसरी तरफ अचानक हृदयाघात (हार्ट अटैक) की खबरें डर पैदा कर देती हैं। तो आखिर सच क्या है? क्या कार्डियो हर हाल में फायदेमंद है या कहीं हम “ज्यादा” करने की भूल तो नहीं कर रहे?
इस लेख में हम बताएंगे – कार्डियो क्या है, क्यों ज़रूरी है, कब नुकसानदेह हो सकता है और कितना है "पर्याप्त"।
कार्डियो: दिल का असली दोस्त?
‘कार्डियो’ शब्द ग्रीक शब्द "कार्डिया" से बना है, जिसका अर्थ है – दिल। यह वो व्यायाम होता है जिसमें दिल की धड़कनें और सांसों की रफ्तार बढ़ती है। रनिंग, साइकलिंग, स्विमिंग, डांसिंग, ब्रिस्क वॉक — ये सभी कार्डियो के उदाहरण हैं।
जब आप कार्डियो करते हैं तो शरीर ज्यादा ऑक्सीजन मांगता है, जिससे हृदय ज्यादा मेहनत करता है और दिल की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
मगर सावधान! हर दिल ‘समान’ नहीं होता
आज 20–30 साल के युवा भी कार्डिएक अरेस्ट से जूझ रहे हैं। सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होते वीडियो — शादी में डांस करते-करते गिर जाना, फुटबॉल खेलते हुए मौत, जिम में एक्सरसाइज करते हुए हृदयघात — ये सिर्फ दुर्भाग्य नहीं, चेतावनी हैं।
हाल ही के मामलों पर गौर करें:
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23 साल की युवती की स्टेज पर डांस के दौरान मौत
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दूल्हा घोड़ी पर चढ़ते समय बेहोश, साइलेंट हार्ट अटैक
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16 साल की छात्रा की अचानक मृत्यु
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युवा एथलीट की हार्ट अटैक से मौत
इन मामलों में ज्यादातर हृदय की पहले से कोई जानकारी नहीं थी, पर तनाव, नींद की कमी, अधिक कार्डियो स्ट्रेस ने घातक परिणाम दिए।
कार्डियो के फायदे
जब सही तरीके से किया जाए, तो कार्डियो के ये फायदे मिलते हैं:
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वजन घटाने में मदद
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अच्छे कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि, खराब कोलेस्ट्रॉल में कमी
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ब्लड प्रेशर कंट्रोल
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एंडॉर्फिन हार्मोन के कारण तनाव में कमी
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बेहतर नींद और पाचन
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हृदय मांसपेशियों की मजबूती
मगर कितना कार्डियो "ठीक" है?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक:
सप्ताह में 150 मिनट का मॉडरेट कार्डियो
या 75 मिनट का इंटेंस वर्कआउट पर्याप्त है।
परंतु यह सभी पर लागू नहीं होता। हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य इतिहास, बीपी और फैमिली बैकग्राउंड अलग होता है।
ओवर-एक्सरसाइज: जब कार्डियो नुकसान देने लगे
एक स्टडी के अनुसार, ज्यादा दौड़ने या लंबे समय तक कार्डियो से दिल की दीवारें मोटी हो सकती हैं। इससे सडन कार्डिएक अरेस्ट, अनियमित हार्टबीट और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
कोपनहेगन सिटी हार्ट स्टडी बताती है कि:
तेज दौड़ने वाले लोगों में सडन कार्डिएक डेथ का खतरा 9 गुना ज्यादा होता है, बनिस्बत उन लोगों के जो धीरे दौड़ते हैं।
क्या है सही तरीका?
कोई भी एक्सरसाइज करते समय इन 4 चरणों का पालन करें:
1. वार्म-अप – 5–10 मिनट (हल्के स्टेप्स, स्ट्रेच)
2. कार्डियो – अपनी क्षमता के अनुसार समय
3. स्ट्रेचिंग – जांघ, पीठ, कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग
4. कूल डाउन – चलना, गहरी सांसें लेना
खानपान का ध्यान
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एक्सरसाइज से 30 मिनट पहले हल्का स्नैक लें जैसे केला, दलिया या फल।
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वर्कआउट के बाद प्रोटीन और हाइड्रेशन जरूरी है।
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एकसाथ ज्यादा पानी न पिएं। घूंट-घूंट कर पिएं।
किन्हें सतर्क रहना चाहिए?
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जिनका पारिवारिक इतिहास हृदय रोग का है
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ब्लड प्रेशर या डायबिटीज से ग्रस्त लोग
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जो पहले कभी वर्कआउट नहीं करते थे
इन लोगों को दौड़ या जिम की बजाय वॉकिंग, साइकलिंग या तैराकी से शुरुआत करनी चाहिए। स्ट्रेस टेस्ट और ईसीजी जरूर कराएं।
FAQs – दिल और कार्डियो से जुड़े सवाल
कार्डियो कब करें – सुबह या शाम?
उत्तर: सुबह कार्डियो से शरीर अलर्ट होता है, लेकिन शाम का कार्डियो भी ठीक है। समय से ज्यादा आपकी consistency मायने रखती है।
क्या वॉकिंग भी कार्डियो है?
उत्तर: हां, ब्रिस्क वॉक (तेज चाल) कार्डियो के तहत आती है।
क्या कार्डियो से ही वजन घटेगा?
उत्तर: नहीं, साथ में strength training, डाइट कंट्रोल और नींद भी जरूरी हैं।
दिल की समस्या हो तो कार्डियो करें या नहीं?
उत्तर: करें, लेकिन डॉक्टर की सलाह से। वॉक, योग और हल्की साइकलिंग से शुरुआत करें।
निष्कर्ष: दिल की सुनिए, लेकिन समझदारी से
हमारे दिल को धड़कते रहना है — न बहुत धीमे, न बहुत तेज़। इसलिए कार्डियो जरूर करें, लेकिन अपने शरीर और दिल की क्षमता को समझते हुए। अगर शुरुआत कर रहे हैं, तो छोटा कदम उठाइए — तेज नहीं, सधा हुआ।
क्योंकि असली फिटनेस वही है जो सालों तक आपका साथ दे, न कि दो हफ्तों की अति मेहनत के बाद हॉस्पिटल।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या के लिए अपने डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें।
