तकनीक और जैविक घड़ी 2026: जब Screen आपके शरीर की Clock तोड़ दे
क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है — रात को 2 बजे तक phone देखते रहे, सुबह 7 बजे alarm बजा, उठे तो लगा जैसे नींद ही नहीं आई?
और फिर पूरा दिन एक धुंध में बीता।
मेरे साथ यह regularly होता था।
क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है — रात को 2 बजे तक phone देखते रहे, सुबह 7 बजे alarm बजा, उठे तो लगा जैसे नींद ही नहीं आई?
और फिर पूरा दिन एक धुंध में बीता।
मेरे साथ यह regularly होता था।
"मैं meditation करने बैठती हूँ — और 2 मिनट में मन कहीं और चला जाता है।"
यह बात मैंने खुद से कितनी बार कही है — गिन नहीं सकती।
शायद phone उठाती हैं। Notifications check करती हैं। या सीधे किचन में जाकर चाय बनाती हैं।
मैं भी यही करती थी।
क्या आपने कभी यह महसूस किया है कि सब कुछ ठीक होने के बाद भी अंदर से कुछ खाली-खाली लगता है?
काम चल रहा है, घर-परिवार ठीक है, खाना-पीना सब है — लेकिन फिर भी एक बेचैनी है। एक अजीब सी थकान जो रात को सोने के बाद भी नहीं जाती। एक feeling जैसे आप अपने आप से disconnect हो गए हों।
मैंने भी यही महसूस किया था।
आखिरी बार आप कब दिल खोलकर हँसे थे?
मेरा मतलब वो हँसी नहीं जो WhatsApp पर किसी meme देखकर आती है और दो सेकंड में चली जाती है। मेरा मतलब है वो हँसी — जब पेट में दर्द होने लगे, आँखों से पानी आ जाए, और सांस लेना मुश्किल हो जाए।
याद आई कोई ऐसी हँसी?
क्या आपने भी कभी यह सोचा है — "इतनी diet करती हूँ, फिर भी वजन क्यों नहीं घटता?"
मैंने भी यही सोचा था।